गोरखनाथ मठ (Gorakhnath Math) भारत के सबसे प्रतिष्ठित और प्रभावशाली धार्मिक व सामाजिक पीठों में से एक है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर में स्थित यह मठ नाथ सम्प्रदाय (Nath Sampradaya) का केंद्रीय पीठ है। यह केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि उत्तर भारत की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और राजनीतिक गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र भी रहा है।

नाथ सम्प्रदाय और गुरु गोरखनाथ का इतिहास
नाथ सम्प्रदाय की उत्पत्ति मध्यकालीन भारत में हुई। इस सम्प्रदाय की स्थापना में गुरु मत्स्येंद्रनाथ (मच्छंदरनाथ) और उनके शिष्य गुरु गोरखनाथ (गोरक्षनाथ) का मुख्य योगदान रहा है।
- गुरु गोरखनाथ का उद्भव: माना जाता है कि गुरु गोरखनाथ 11वीं से 12वीं शताब्दी के बीच प्रकट हुए। उन्होंने हठयोग (Hatha Yoga) और प्राणायाम की परंपरा को जन-जन तक पहुँचाया।
- दर्शन और साधना: नाथ सम्प्रदाय का मूल दर्शन शिव भक्ति और पिंड-ब्रह्मांड के ऐक्य पर आधारित है। इन्होंने जाति-पात और बाह्य आडंबरों का विरोध करते हुए आंतरिक शुद्धि और योग साधना पर बल दिया।
- गोरखपुर का नामकरण: जिस स्थान पर गुरु गोरखनाथ ने तपस्या की थी, उसी पवित्र स्थल पर गोरखनाथ मठ की स्थापना हुई। इस पीठ के नाम पर ही पूरे शहर का नाम ‘गोरखपुर’ पड़ा।
गोरखनाथ मठ का ऐतिहासिक विकास
शताब्दियों के दौरान गोरखनाथ मठ ने भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
- मध्यकालीन संरक्षण और संघर्ष: मुगल काल के दौरान पीठ को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन नाथ योगियों ने अपनी आध्यात्मिक और सामाजिक एकजुटता के बल पर मठ के अस्तित्व और परंपराओं को सुरक्षित रखा।
- ब्रिटिश काल और पुनर्जागरण: 19वीं और 20वीं सदी में पीठ ने सामाजिक सुधारों, शिक्षा के प्रसार और स्वतंत्रता संग्राम में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष योगदान दिया।
- नाथ परंपरा के पीठाधीश्वर: पीठ के महंतों की श्रृंखला ने इसे केवल आध्यात्मिक केंद्र तक सीमित न रखकर जनसेवा और राष्ट्रीय चेतना का केंद्र बनाया।
आधुनिक युग के प्रमुख महंत एवं उनका योगदान
गोरखनाथ मठ के आधुनिक इतिहास को दिशा देने में तीन प्रमुख महंतों की केंद्रीय भूमिका रही है:
| महंत का नाम | कार्यकाल / समय | मुख्य योगदान एवं प्रभाव |
| महंत दिग्विजय नाथ | 1927 – 1969 | शिक्षा संस्थानों (महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद) की स्थापना, राम जन्मभूमि आंदोलन की नींव और हिंदू महासभा में सक्रियता। |
| महंत अवैद्यनाथ | 1969 – 2014 | सामाजिक समरसता आंदोलन, दलित सुधार कार्यक्रम तथा श्री राम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति का नेतृत्व। |
| महंत योगी आदित्यनाथ | 2014 – वर्तमान | मठ का आधुनिक बुनियादी ढाँचा, जनकल्याणकारी परियोजनाएँ तथा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासनिक भूमिका। |
मकर संक्रांति और प्रसिद्ध ‘खिचड़ी मेला’
गोरखनाथ मठ की सबसे बड़ी सांस्कृतिक पहचान प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला मकर संक्रांति खिचड़ी मेला है।
- पौराणिक कथा: मान्यता है कि त्रेतायुग में गुरु गोरखनाथ ज्वाला देवी के स्थान से भ्रमण करते हुए गोरखपुर आए थे। यहाँ के लोगों ने उन्हें भोजन के रूप में चावल और दाल (खिचड़ी) अर्पित किया। तब से हर मकर संक्रांति पर श्रद्धालु यहाँ कच्चे अनाज (खिचड़ी) का दान करते हैं।
- सांस्कृतिक समागम: इस अवसर पर पूरे भारत और नेपाल से लाखों श्रद्धालु मठ में दर्शन करने आते हैं। नेपाल का राजपरिवार भी पारंपरिक रूप से यहाँ पहली खिचड़ी अर्पित करता है।
गोरखनाथ मठ का वर्तमान स्वरूप और सामाजिक भूमिका
वर्तमान समय में गोरखनाथ मठ एक विशाल आध्यात्मिक, शैक्षणिक और सामाजिक परिसर का रूप ले चुका है:
- शैक्षणिक संस्थान: मठ द्वारा संचालित महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के तहत प्राथमिक विद्यालयों से लेकर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, इंजीनियरिंग और आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज संचालित होते हैं।
- चिकित्सा और जनसेवा: परिसर में ‘गुरु श्री गोरखनाथ अस्पताल’ स्थित है, जो अत्यंत रियायती दरों पर आम जनता को आधुनिक चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करता है।
- जनता दरबार: महंत योगी आदित्यनाथ की परंपरा के अनुसार मठ में प्रतिदिन ‘जनता दरबार’ आयोजित होता है, जहाँ समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं का समाधान किया जाता है।
- धार्मिक समरसता: मठ का परिसर बिना किसी जाति, पंथ या भेदभाव के सभी वर्ग के लोगों के लिए खुला रहता है। ऐतिहासिक रूप से मठ के निर्माण और मेलों में स्थानीय मुस्लिम कारीगरों व व्यापारियों की भी सक्रिय भागीदारी रही है।


