असम की राजधानी दिसपुर के पास स्थित कामाख्या मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है और यहां देवी सती के योनि भाग (महामुद्रा) की पूजा की जाती है। कामाख्या मंदिर हिंदू धर्म में विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा के लिए महत्वपूर्ण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कामाख्या मंदिर का इतिहास
कामाख्या मंदिर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के मृत शरीर को लेकर तांडव नृत्य कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सती के शरीर के टुकड़े कर दिए। सती के शरीर के ये टुकड़े जहां-जहां गिरे, वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। कामाख्या मंदिर उन 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां सती का योनि भाग गिरा था।
मंदिर का निर्माण कामरूप के राजा नरकासुर ने करवाया था, लेकिन समय-समय पर इसका जीर्णोद्धार होता रहा। 16वीं शताब्दी में कोच राजवंश के राजा विश्व सिंह ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया। आज यह मंदिर असम की संस्कृति और धार्मिक परंपराओं का प्रतीक बन चुका है।
कामाख्या मंदिर की वास्तुकला
कामाख्या मंदिर की वास्तुकला अद्वितीय है। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है और इसकी संरचना में तांत्रिक प्रतीकों का समावेश है। मंदिर के गर्भगृह में कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि यहां एक प्राकृतिक शिला के रूप में देवी की योनि की पूजा की जाती है। मंदिर के चारों ओर छोटे-छोटे मंदिर हैं, जो दस महाविद्याओं को समर्पित हैं।
मंदिर का शिखर बहुत ही सुंदर और आकर्षक है, जो असमिया वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंदिर के अंदरूनी भाग में तांत्रिक चिन्ह और प्रतीक देखे जा सकते हैं, जो इसकी रहस्यमयता को और बढ़ाते हैं।
कामाख्या मंदिर का धार्मिक महत्व
कामाख्या मंदिर को तांत्रिक साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां तांत्रिक अनुष्ठान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। मंदिर में हर साल अंबुबाची मेले का आयोजन होता है, जो बहुत ही प्रसिद्ध है। यह मेला मानसून के दौरान आयोजित किया जाता है, जब माना जाता है कि देवी कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस दौरान मंदिर तीन दिनों के लिए बंद रहता है और चौथे दिन भक्तों के दर्शन के लिए खोला जाता है। इस अवसर पर हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं।
कामाख्या मंदिर में देवी की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां तांत्रिक साधना करने वाले साधकों को विशेष शक्तियां प्राप्त होती हैं।

कामाख्या मंदिर से जुड़ी रहस्यमय कथाएं
कामाख्या मंदिर से कई रहस्यमय कथाएं जुड़ी हुई हैं। कहा जाता है कि यहां देवी कामाख्या स्वयं प्रकट हुई थीं और उन्होंने अपने भक्तों की रक्षा की। मंदिर के गर्भगृह में स्थित शिला से हमेशा जल की धारा बहती है, जिसे देवी का रजस्वला रूप माना जाता है। इस जल को पवित्र माना जाता है और भक्त इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
एक अन्य कथा के अनुसार, यहां तांत्रिक साधना करने वाले साधकों को देवी के दर्शन होते हैं और वे उनसे वरदान प्राप्त करते हैं। यह मंदिर अपने रहस्यों और चमत्कारों के लिए प्रसिद्ध है।

कैसे पहुंचें कामाख्या मंदिर?
कामाख्या मंदिर तक पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी हवाई अड्डा गुवाहाटी है, जो लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से भी मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। गुवाहाटी से बस और टैक्सी की सुविधा भी उपलब्ध है।
निष्कर्ष
कामाख्या मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह शक्ति, रहस्य और आस्था का प्रतीक है। यहां आने वाले भक्तों को एक अलग ही शांति और ऊर्जा का अनुभव होता है। अगर आप भारत की प्राचीन संस्कृति और धार्मिक परंपराओं को समझना चाहते हैं, तो कामाख्या मंदिर की यात्रा अवश्य करें। यह स्थान आपके मन और आत्मा को शुद्ध कर देगा और आपको एक नई ऊर्जा से भर देगा।
जय माता दी!
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