# sushilrawal.com > All About Knowledge ## Posts - [मराठा साम्राज्य के महान पुनरुद्धारक: महादजी शिंदे का जीवन, शौर्य और गौरवशाली इतिहास](https://sushilrawal.com/mahadji-shinde/): अठारहवीं शताब्दी का भारत राजनीतिक उथल-पुथल, बिखरते साम्राज्यों और महत्वाकांक्षी शक्तियों के उदय का साक्षी रहा है। इस दौर में जहां एक ओर मुग़ल साम्राज्य अपनी अंतिम सांसें गिन रहा था, वहीं दूसरी ओर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी देश में अपने पैर पसारने की कोशिश कर रही थी। इसी अनिश्चित कालखंड में मराठा साम्राज्य ने १४ जनवरी १७६१ को पानीपत के तीसरे युद्ध में एक ऐसा आघात सहा, जिसने उसकी रीढ़ तोड़ दी थी। तत्कालीन इतिहासकारों और समकालीन शक्तियों का मानना था कि मराठा शक्ति अब कभी उठ नहीं पाएगी। लेकिन इतिहास को कुछ और ही मंजूर था। पानीपत की […] - [महाभारत का अंतिम अध्याय: पांडवों के हस्तिनापुर त्याग और राजा परीक्षित के राज्याभिषेक के बाद की संपूर्ण गाथा](https://sushilrawal.com/after-mahabharat-story/): महाभारत का युद्ध कुरुक्षेत्र के मैदान में १८ दिनों में समाप्त हो गया था, लेकिन उस महाविनाश के बाद जो कुछ घटित हुआ, वह मानव इतिहास, अध्यात्म और काल चक्र की गति को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अध्याय है। अमूमन लोग कुरुक्षेत्र के युद्ध और युधिष्ठिर के राज्याभिषेक को ही महाभारत का अंत मान लेते हैं, परंतु वास्तव में महाभारत की कथा इसके बहुत आगे तक जाती है। कुरुक्षेत्र युद्ध के बाद युधिष्ठिर ने ३६ वर्षों तक हस्तिनापुर पर धर्मपूर्वक शासन किया। इसके बाद एक ऐसा समय आया जब गांधारी का शाप फलीभूत हुआ, यदुवंश का विनाश हुआ और […] - [जय बाबा केदार: केदारनाथ ज्योतिर्लिंग का पौराणिक इतिहास और आज का आधुनिक स्वरूप](https://sushilrawal.com/kedarnath/): हिमालय की तुंग गगनचुंबी चोटियों के मध्य, मंदाकिनी नदी के पावन तट पर स्थित श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग सनातन धर्म के सबसे पवित्र और प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। भारत के बारह ज्योतिर्लिंगों में ग्यारहवें स्थान पर सुशोभित बाबा केदार का यह धाम न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह अपने अद्वितीय इतिहास, अलौकिक वास्तुकला और अदम्य जीवंतता के लिए भी जाना जाता है। यह लेख केदारनाथ ज्योतिर्लिंग के पौराणिक संदर्भों, ऐतिहासिक विकासक्रम, 2013 की भीषण विभीषिका और वर्तमान स्वरूप का एक विस्तृत दस्तावेज़ है। 1. भौगोलिक स्थिति और प्राकृतिक विहंगम दृश्य केदारनाथ मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग […] - [पुष्यमित्र शुंग: मौर्य साम्राज्य का अंत और शुंग वंश का उदय](https://sushilrawal.com/puchya-mitra-shunga/): पुष्यमित्र शुंग प्राचीन भारत के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और शक्तिशाली सम्राट थे, जिन्होंने मौर्य वंश के अंतिम शासक की हत्या कर शुंग राजवंश की स्थापना की। उन्हें भारतीय इतिहास में ‘वैदिक धर्म के पुनरुद्धारक’ के रूप में जाना जाता है। 1. सत्ता का उदय पुष्यमित्र शुंग मौर्य सम्राट बृहद्रथ की सेना के प्रधान सेनापति (सेनानी) थे। 185 ईसा पूर्व के आसपास, जब मौर्य साम्राज्य कमजोर हो रहा था और विदेशी आक्रमणों का खतरा बढ़ रहा था, पुष्यमित्र ने एक सैन्य परेड के दौरान सम्राट बृहद्रथ की हत्या कर दी और स्वयं को राजा घोषित किया। 2. प्रमुख उपलब्धियां और विजय […] - [विजय नगर हिन्दू साम्राज्य का अंत कैसे हुआ](https://sushilrawal.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9c%e0%a4%af-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a6%e0%a5%82-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%8d/): आसमा इतनी बुलंदी पे इतराता है भूल जाता है की जमी से ही नजर आता है वसीम बरेलवी का ये शेर विजय नगर साम्राज्य पे एक दम सटीक बैठता है। इतिहास के जानकारों की माने तो शदाशिवराय केवल नाम के ही राजा थे असली ताकत तो कृष्णा देव राय की दामाद रामराय के हाथो में थी। जिन्हे उस समय आलिया कह कर बुलाया जाता था। दरसल आलिया कन्नड़ भाषा का शब्द है जिसका हिंदी अर्थ होता है बेटी का पति। यु तो राजा शदाशिव राय भी गजब के शाशक थे जो दक्खन की ऊपर सल्तनतों को आपस में भिड़वा कर […] - [जब कश्मीर में घडिया आधा घंटा पीछे चलने लगी – कहानी कश्मीरी पंडितो की](https://sushilrawal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%ac-%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%98%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%86%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%98%e0%a4%82/): बहुत बड़े धोखे का दिन है १९ जनवरी. उन तमाम लाचारियों ,मजबूरियों और न भुलाने वाले दर्द का दिन, जब हमारे अपने लोग यानि कश्मीरी पंडितो अपने घरों से भाग जाने को मजबूर करते हैं. सरकार भी मुस्लिम वोट बैंक के लिए उनका साथ नहीं देती. फिर उनके अथा दर्द को भुला भी दिया जाता है. जी हा ये सब हमारे देश प्यारे भारत में ही हुआ है. अप्रेल १९८८ की बात है इस्लामाबाद में टॉप सीक्रेट मीटिंग चल रही थी। अपनी बुलनद आवाज में राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक़ फरमाते है जेंटलमेन शक और सूबा की कोई गुंजाईश नहीं […] - [एक नेता जो पैदल चलते हुए मुख्यमंत्री बना – शिवराज सिंह चौहान ](https://sushilrawal.com/%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%9c%e0%a5%8b-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%a6%e0%a4%b2-%e0%a4%9a%e0%a4%b2%e0%a4%a4%e0%a5%87-%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%8f-%e0%a4%ae%e0%a5%81/): साल २०१४ – राष्ट्रीय सवयम सेवक संघ १९२५ से जिस काम में लगा हुआ था वो नरेंद्र मोदी के प्रधान मंत्री बनने के बाद उसका एक पड़ाव पूरा हुआ। लेकिन संघ सरकारों की तरह ५ साल की इकाई में नहीं सोचता वो सोचता है दशकों में। तो २०१४ खुद को दोहराता रहे इसलिए जरुरी था की संघ की नर्सरी से मोदी के सब और भी काबिल लोग निकले। उसमे से एक नाम है बात बात पे खुद को किसान का बेटा बताने वाले शिवराज सिंह चौहान का। भोपाल एक छोटी से तहसील हुआ करता था जिल्ला लगता था सीहोर। इसी […] - [कहानी गिलगित बाल्टिस्तान के विवाद की – सुशिल रावल](https://sushilrawal.com/%e0%a4%95%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%bf%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%a8/): १८३९ में महाराज रंजीत सिंह दुनिया से रूक्षत हुए और उत्तर पछिम भारत में सीखो का साम्राज्य सिकुड़ता चला गया । १८४५ में पहला एंग्लो-सिख युद्ध हुआ और अंग्रेज जित गए और १८४६ में लाहौर ट्रेटी पर दस्तखत हुए। और कश्मीर अंग्रेजो के हिस्से में चला गया। लेकिन इस ठन्डे और पहाड़ी इलाके में कीमती समय और पैसा खर्च करने में अपनी दिलजस्पी ले नहीं रहे थे। लिहाजा वही तरीका अपनाया गया जैसा बाकि कई रियासतों में अपनाया गया था कुछ ही दिनों बाद अंग्रेजो ने ७५ लाख रुपये लेके कश्मीर और गिलगित बाल्टिस्तान को महाराज गुलाब सिंह के हवाले […] - [जानिए कनिष्क का इतिहास](https://sushilrawal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-%e0%a4%95%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%95-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%87%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b8/): कनिष्क का इतिहास जीवनी : कनिष्क प्रथम को इतिहास में इनकी विजय, धार्मिक प्रवृत्ति, साहित्य तथा कला का प्रेमी के रूप में जाना जाता हैं. इनके जन्म और राज्याभिषेक वर्ष के सम्बंध में मतभेद हैं. शिव व कार्तिकेय के भक्त होने के साथ ही ये बौद्ध अनुयायी थे. तथा तुलना गिनती अशोक महान से की जाती हैं. ईसवीं 78 में इन्होंने शक संवत चलाया, जब इन्होने शासन की शुरुआत की थी. महान भारतीय सम्राट कनिष्क प्राचीन भारत के महत्वपूर्ण शासक रहे हैं ये कुषाण वंश से सम्बन्धित थे कुषाण राजवंश (लगभग 30 ई. से लगभग 225 ई. तक) को विदेशी […] - [जानिए 51 शक्तिपीठ के बारे में](https://sushilrawal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-51-%e0%a4%b6%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%80%e0%a4%a0-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87-%e0%a4%ae%e0%a5%87/): पुराणों के अनुसार सती के शव के विभिन्न अंगों से शक्तिपीठों का निर्माण हुआ था। इसके पीछे एक विशेष कथा है, बताते हैं कि दक्ष प्रजापति ने कनखल (हरिद्वार) में ‘बृहस्पति सर्व’ नामक यज्ञ रचाया। उस यज्ञ में ब्रह्मा, विष्णु, इंद्र और अन्य देवी-देवताओं को आमंत्रित किया गया, लेकिन उन्‍होंने जान-बूझकर अपने जमाता भगवान भगवान शंकर को नहीं बुलाया। शंकर जी की पत्नी और दक्ष की पुत्री सती पिता द्वारा न बुलाए जाने पर और भोलेनाथ के रोकने पर भी यज्ञ में भाग लेने गईं। यज्ञ-स्थल पर सती ने अपने पिता दक्ष से शंकर जी को आमंत्रित न करने का […] - [आदि शंकराचार्य और ‘शंकर दिग्विजय यात्रा](https://sushilrawal.com/%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf-%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a4%82%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%a6%e0%a4%bf/): भारत भूमि में सनातन धर्म क्षीण होता जा रहा था। हिन्दू धर्म से विखंडित हुए पंथ, सनातन धर्म को ही चुनौती देने लगे थे। ऐसे में सनातन धर्म को पुनर्स्थापित करने का बीड़ा उठाया आदि शंकराचार्य ने। उन्होंने भारत भूमि की यात्रा प्रारंभ की जिसे ‘शंकर दिग्विजय यात्रा’ कहा जाता है। यह कोई युद्ध यात्रा नहीं थी। अपितु इसे ज्ञान यात्रा कहना उचित होगा, क्योंकि आदि शंकराचार्य ने एक रणनीति बनाई थी जिसके तहत वह भारत के विभिन्न धर्म केंद्रों की यात्रा करते और वहाँ उपस्थित धर्म गुरुओं को तर्क और शास्त्रार्थ की चुनौती देते। हारने वाला व्यक्ति जीतने वाले […] - [जानिए 12 ज्योतिर्लिंग बारे में](https://sushilrawal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%8f-12-%e0%a4%9c%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87/): पुराणों में कहा गया है कि जब तक महादेव के इन 12 ज्योतिर्लिंग के दर्शन नहीं कर लेते, आपका आध्यात्मिक जीवन पूर्ण नहीं हो सकता. हिंदू मान्यता के अनुसार ज्योतिर्लिंग कोई सामान्य शिवलिंग नहीं है. ऐसा कहा जाता है कि इन सभी 12 जगहों पर भोलेनाथ ने खुद दर्शन दिए थे, तब जाकर वहां ये ज्योतिर्लिंग उत्पन्न हुए बता दें, ज्योतिर्लिंग एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ होता है ‘रोशनी का प्रतीक’. आइए जानते हैं भगवान शिव के इन 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों के बारे मे. 1- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग – सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं अपितु इस पृथ्वी का पहला […] - [बाजी प्रभु देशपांडे](https://sushilrawal.com/%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ad%e0%a5%81-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a5%87/): बाजी प्रभु देशपांडे मराठा इतिहास में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण नाम है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के साहसी, निडर और देशभक्ति से परिपूर्ण व्यक्तित्व वाले सरदार थे। बाजी के पिताजी, हिरडस, मावल के देश कुलकर्णी थे। बाजी की वीरता की देखकर ही महाराज शिवाजी ने उनको अपनी युद्धसेना में उच्चपद पर रखा। ई.स. १६४८ से १६४९ तक उन्होंने शिवाजी के साथ रहकर पुरंदर, कोंडाणा और राजापुर के किले जीतने में भरसक मदद की। बाजी प्रभु ने रोहिडा किले को मजबूत किया और आसपास के किलों को भी सुदृढ़ किया। इससे वीर बाजी को मावलों का जबरदस्त कार्यकर्ता समझा जाने लगा। इस […] - [आखिर हार्मोन शरीर में क्या काम है?आखिर किसे कहते हैं हार्मोन?](https://sushilrawal.com/%e0%a4%86%e0%a4%96%e0%a4%bf%e0%a4%b0-%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a8-%e0%a4%b6%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af/): इंसानी शरीर एक तरह की मशीन ही हैं, क्योंकि इसके अंदर कई तरह की अलग-अलग गतिविधियां एक साथ होती रहती हैं।इस शरीर को समझने के लिए वैज्ञानिक कई सारे प्रयोगों को आए दिन अंजाम देते रहते हैं। परंतु आज भी वैज्ञानिक इसे पूरी तरीके से समझने में असमर्थ रहें हैं। खैर जीव विज्ञान के दृष्टि कोण से देखें तो हमारे शरीर के अंदर कई सारे ऐसे पदार्थ मौजूद हैं जो हमारी इस जटिल बायोलोजिकल मशीन को चलाने में मदद करते हैं। वैसे इन पदार्थों में से एक खास पदार्थ का नाम हैं हार्मोन । हार्मोन ही वही पदार्थ हैं जो […] - [डॉ.राम मनोहर लोहिया – भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी समाजवादी राजनेता](https://sushilrawal.com/%e0%a4%a1-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%b0-%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a5%87/): राम मनोहर लोहिया भारत के स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी, प्रखर चिन्तक तथा समाजवादी राजनेता थे। राम मनोहर लोहिया को भारत एक अजेय योद्धा और महान् विचारक के रूप में देखता है। देश की राजनीति में स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और स्वतंत्रता के बाद ऐसे कई नेता हुए जिन्होंने अपने दम पर शासन का रुख़ बदल दिया जिनमें एक थे राममनोहर लोहिया। अपनी प्रखर देशभक्ति और बेलौस तेजस्‍वी समाजवादी विचारों के कारण अपने समर्थकों के साथ ही डॉ. लोहिया ने अपने विरोधियों के मध्‍य भी अपार सम्‍मान हासिल किया। डॉ. लोहिया सहज परन्तु निडर अवधूत राजनीतिज्ञ थे। उनमें सन्त की सन्तता, फक्कड़पन, […] - [केशव राव बलीराम हेडगेवार](https://sushilrawal.com/%e0%a4%95%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%b5-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%ac%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b9%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0/): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डा. केशव राव बलीराम हेडगेवार (Keshav Baliram Hedgewar) का जन्म 8 अप्रैल 1889 को नागपुर के एक गरीब ब्राह्मण परिवार में हुआ था | वह बचपन से ही क्रांतिकारी प्रवृति के थे और उन्हें अंग्रेज शासको से घृणा थी | अभी स्कूल में ही पढ़ते थे कि अंग्रेज इंस्पेक्टर के स्कूल में निरिक्षण के लिए आने पर केशव राव (Keshav Baliram Hedgewar) ने अपने कुछ सहपाठियों के साथ उनका “वन्दे मातरम” जयघोष से स्वागत किया जिस पर वह बिफर गया और उसके आदेश पर केशव राव को स्कूल से निकाल दिया गया | तब उन्होंने […] - [मिल्की वे (आकाश गंगा)](https://sushilrawal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b5%e0%a5%87-%e0%a4%86%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b6-%e0%a4%97%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be/): मिल्की वे (आकाश गंगा) क्या हैं? –आशा करता हूँ की आप सभी लोग इस का आनंद ले रहे होंगे| खैर अब विषय पर आते हैं| परंतु थोड़ी देर के लिए रुकिए मैंने हाल ही में पृथ्वी के अलावा रहने योग्य 5 अलग-अलग प्रकार के ग्रहों के बारे में एक आलेख लिखा हैं| अगर आपने उस को अभी तक नहीं पढ़ा हैं तो एक बार उस आलेख को पढ्ना न भूलें| आज हम हमारे मिल्की वे यानी आकाशगंगा(milky way) के ऊपर बहुत सारे रोचक बातों को जानेंगे (milky way facts in Hindi)| मित्रों! इस से पहले हमने अंतरिक्ष में मौजूद बहुत […] - [भूमिपुत्र – मुलायम सिंह यादव](https://sushilrawal.com/%e0%a4%ad%e0%a5%82%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%af%e0%a4%be/): मुलायम सिंह यादव का जन्म 22 नवम्बर 1939 को इटावा जिले के सैफई गाँव में मूर्ती देवी व सुघर सिंह के किसान परिवार में हुआ था। मुलायम सिंह अपने पाँच भाई-बहनों में रतनसिंह से छोटे व अभयराम सिंह, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल सिंह यादव और कमला देवी से बड़े हैं। धरती पुत्र’ उपनाम से मशहूर मुलायम सिंह यादव का शाही जन्म दिन चर्चा का केंद्र बन गया है। मुलायम सिंह यादव का यह 75वां जन्मदिन है। इस जन्म दिन को यादगार बनाने के लिए रामपुर को दूल्हन की तरह सजाया गया है। मुलायम सिंह यादव ‘विक्टोरिया बग्गी’ से रामपुर में […] - [हिंदु ह्रदय सम्राट – बालासाहेब ठाकरे](https://sushilrawal.com/%e0%a4%b9%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%81-%e0%a4%b9%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a6%e0%a4%af-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b8/): बाल केशव ठाकरे एक भारतीय राजनेता थे जिन्होंने शिवसेना की स्थापना की। वे मराठी को ज्यादा प्राधान्य देते थे और उनकी पार्टी पश्चिमी महाराष्ट्र में सक्रीय रूप से कार्य कर रही है। उनके सहयोगी उन्हें “बालासाहेब” के नाम से पुकारते हैं। उनके अनुयायी उन्हें हिंदु ह्रदय सम्राट बुलाते हैं। बाल ठाकरे का जन्म पुणे शहर में 23 जनवरी 1926 को रमाबाई और केशव सीताराम ठाकरे (प्रबोधनकार ठाकरे के नाम से भी जाने जाते थे), इनके यहा हुआ। वो अपने 9 भाई-बहनों में सबसे बड़े थे। केशव ठाकरे एक सामाजिक कार्यकर्त्ता थे जो 1950 में हुए संयुक्त महाराष्ट्र अभियान में भी […] - [लालू प्रसाद यादव – जीवन परिचय](https://sushilrawal.com/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%82-%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b5-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b5%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf/): लालू प्रसाद यादव भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री हैं। लालू प्रसाद यादव भारत के सफल रेलमन्त्रियों में गिने जाते हैं। लालू प्रसाद यादव को चारा घोटाले के आरोप में 3 अक्‍टूबर 2013 को रांची स्थित सीबीआई के विशेष अदालत ने 5 साल की सजा और 25 लाख का जुर्माने की सजा सुना दिया। कोर्ट ने लालू प्रसाद को चाईबासा कोषागार से 37 करोड़ 68 लाख रूपए को गबन करने का आरोप में दोषी पाया था। जीवन परिचय : इनका जन्‍म 11 जून 1947 को बिहार राज्‍य के गोपालगंज जिले के फूलवरिया गांव में यादव परिवार में […] - [किंगमेकर – अमित शाह](https://sushilrawal.com/%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%85%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9/): अमित शाह का जन्म 1964 में मुंबई के एक संपन्न गुजराती परिवार में हुआ। सोलह वर्ष की आयु तक वह अपने पैत्रक गांव मान्सा, गुजरात में ही रहे और वहीँ स्कूली शिक्षा प्राप्त की। स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात उनका परिवार अहमदाबाद चला गया। बालपन में वह सदैव महान राष्ट्रभक्तों की जीवनियों से प्रेरित हुआ करते थे, इसी प्रेरणा के फलस्वरूप उन्होंने भी मातृभूमि की सेवा करने और राष्ट्र की प्रगति में योगदान देने का स्वप्न देखा। वह विशेष रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की राष्ट्रीयवादी भावना तथा उनके दृष्टांत से प्रेरित व प्रभावित हुए तथा अहमदाबाद में संघ […] - [फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ – पूर्व भारतीय सेना प्रमुख](https://sushilrawal.com/%e0%a4%ab%e0%a5%80%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%a1-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6%e0%a4%b2-%e0%a4%b8%e0%a5%88%e0%a4%ae-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%95%e0%a4%b6-%e0%a4%aa/): जन्म 3 अप्रैल 1914 को पंजाब में स्थित अमृतसर में हुआ था, फील्ड मार्शल मानेकशॉ 1969 में भारतीय सेना के प्रमुख सेना अध्यक्ष बने और उनके आदेश के तहत, 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारतीय सेना ने एक शानदार जीत हासिल की। वह फील्ड मार्शल का सर्वोच्च पद (रैंक) रखने वाले दो भारतीय सैन्य अधिकारियों में से एक हैं। उन्होंने चार दशकों तक सेना में रहकर सेवा की और द्वितीय विश्व युद्ध सहित पाँच युद्धों को भी अपने कार्यकाल में देखा। वह भारतीय सैन्य अकादमी (आई.एम.ए.) देहरादून में, 40 सैनिक छात्रों के पहले समूह में से एक थे, जहाँ […] - [कैप्टन विक्रम बत्रा – परमवीर चक्र](https://sushilrawal.com/%e0%a4%95%e0%a5%88%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%ae%e0%a4%b5/): कैप्टन विक्रम बत्रा परमवीर चक्र से सम्मानित भारत के सैनिक थे। इन्हें यह सम्मान सन् 1999 में मरणोपरांत मिला। कैप्‍टन विक्रम बत्रा का जन्‍म 9 सितंबर 1974 को हिमाचल प्रदेश के पालमपुर जिले के घुग्‍गर में हुआ था। उनके पिता का नाम जीएम बत्रा और माता का नाम कमलकांता बत्रा है। 1996 में विक्रम ने इंडियन मिलिटरी अकैडमी में दाखिला लिया। 13 जम्मू ऐंड कश्मीर राइफल्स में 6 दिसम्बर 1997 को लेफ्टिनेंट के पोस्ट पर विक्रम की जॉइनिंग हुई। 1 जून 1999 को उनकी टुकड़ी को करगिल युद्ध में भेजा गया। हम्प व राकी नाब स्थानों को जीतने के बाद […] - [नेताजी सुभाष चंद्र बोस – तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा](https://sushilrawal.com/%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b7-%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b8-%e0%a4%a4%e0%a5%81/): नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को उड़ीसा में कटक के एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ था। बोस के पिता का नाम ‘जानकीनाथ बोस’ और माँ का नाम ‘प्रभावती’ था। जानकीनाथ बोस कटक शहर के मशहूर वक़ील थे। प्रभावती और जानकीनाथ बोस की कुल मिलाकर 14 संतानें थी, जिसमें 6 बेटियाँ और 8 बेटे थे। सुभाष चंद्र उनकी नौवीं संतान और पाँचवें बेटे थे। अपने सभी भाइयों में से सुभाष को सबसे अधिक लगाव शरदचंद्र से था। आरम्भिक जीवन : नेताजी ने अपनी प्रारंभिक पढ़ाई कटक के रेवेंशॉव कॉलेजिएट स्कूल में हुई। तत्पश्चात् उनकी शिक्षा कलकत्ता […] - [विनायक दामोदर सावरकर – राष्ट्रभक्त स्वातंत्र्य वीर](https://sushilrawal.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%a6%e0%a4%be%e0%a4%ae%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%b0-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7/): विनायक सावरकर का जन्म महाराष्ट्र (तत्कालीन नाम बम्बई) प्रान्त में नासिक के निकट भागुर गाँव में हुआ था। उनकी माता जी का नाम राधाबाई तथा पिता जी का नाम दामोदर पन्त सावरकर था। इनके दो भाई गणेश (बाबाराव) व नारायण दामोदर सावरकर तथा एक बहन नैनाबाई थीं। जब वे केवल नौ वर्ष के थे तभी हैजे की महामारी में उनकी माता जी का देहान्त हो गया। इसके सात वर्ष बाद सन् १८९९ में प्लेग की महामारी में उनके पिता जी भी स्वर्ग सिधारे। इसके बाद विनायक के बड़े भाई गणेश ने परिवार के पालन-पोषण का कार्य सँभाला। दुःख और कठिनाई […] - [सपनो की नगरी – दुबई में क्या देखें कहाँ जाएँ](https://sushilrawal.com/%e0%a4%b8%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8b-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%a6%e0%a5%81%e0%a4%ac%e0%a4%88-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be/): दुबई शहर यानि सपनो की नगरी, आप जब भी इस स्थान पर जाएंगे तो एक अलग ही परिवेश में अपने आपको पाएंगे। दुबई की लौकप्रियता का पता इसी बात से चलता हैं कि यहां रहने वाली जनसँख्या में मात्र 15 प्रतिशत ही यहां के निवासी हैं, जबकि बाकि अन्य देशो के निवासी हैं। दुबई का सबसे बड़ा आकर्षण दुनिया की सबसे उंची 163 मंजिला ईमारत बुर्ज खलीफा है। प्रतिदिन 4 लाख गैलन पानी की डिमांड वाला गोल कोर्स दुबई में ही स्थित हैं। दुबई शहर की जितनी तारीफ की जाएं कम हैं, 2 साल में अपना मेट्रो रेलवे नेटवर्क स्थापित […] - [लाचित बोरपुखान – मुगलों को 17 बार हराने वाले अहोम योद्धा](https://sushilrawal.com/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%a4-%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b0%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%97%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a5%8b-17/): आपने मुगलों और राजपूतों की लड़ाई ज़रूर सुनी होगी। बाबर के ख़िलाफ़ लड़ाई में सैकड़ों घाव लिए लड़ते राणा सांगा की वीरता और अकबर के विरुद्ध घास की रोटी खा कर आज़ादी का युद्ध लड़ने वाले महाराणा प्रताप का नाम सबसे सुना है। उनकी गाथाएँ घर-घर पहुँचनी चाहिए। आज हम आपको कुछ ऐसे योद्धाओं के बारे में बताना चाह रहे हैं, जिन्होंने मुगलों के पसीने छुड़ाए थे। ये हैं असम के अहोम योद्धा। असम को प्राचीन काल में कामरूप या प्राग्यज्योतियशपुरा के रूप में जाना जाता था। इसकी राजधानी आधुनिक गुवाहाटी हुआ करती थी। इस साम्राज्य के अंतर्गत असम की […] - [Attila the Hun: Biography](https://sushilrawal.com/attila-the-hun-biography/): Attila was king of the Huns, a non-Christian people based on the Great Hungarian Plain in the fifth century A.D. At its height, the Hunnic Empire stretched across Central Europe. The Romans considered the Huns to be barbarians, and under Attila’s rule the Huns pillaged and destroyed many Roman cities. His date of birth is unknown but he died in A.D. 453 on his wedding night (he practiced polygamy and had multiple wives). Whether his death was natural, or whether he was murdered by his new wife, Ildico, is still a subject of debate. By the time he died, the […] - [Madhya Pradesh – The heart of incredible India](https://sushilrawal.com/madhya-pradesh-the-heart-of-incredible-india/): Madhya Pradesh, popularly known as the Heart of India, is the second largest state. The history of this state, its geographical location, its natural beauty, its cultural heritage and the people, make it one of the best Indian tourism destinations. Bhopal being the capital is popularly known as the City of Lakes. Madhya Pradesh tourism offers all aspects of tourism for tourists to explore and indulge. From watching tigers at the Bandhavgarh National Park to wowing the architecture of the temples at Khajuraho, one can discover the real India. The central location of the state, as well as the rich […] - [Amazing Arunachal Pradesh – North East INDIA](https://sushilrawal.com/amazing-arunachal-pradesh-north-east-india/): A venerable nature’s paradise lies in the north-easternmost corner of the Indian subcontinent. Teeming with virgin forests, gorgeous peaks and home to 26 indigenous tribes, Arunachal Pradesh is unexplored and inviting. A patch of green on the Indian map, the largest member of the Seven Sisters has rightly owned the sobriquet “Land of Dawn Lit Mountains”. Places to SeeArunachal Pradesh offers a plethora of options for travelers seeking beauty, culture or just adrenaline rush. Although every inch of Arunachal Pradesh is a revelation in itself, however, for those who wish to have a bit of everything, here are the top […] - [पानीपत का तीसरा युद्ध: – मराठा v/s अब्दाली](https://sushilrawal.com/%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%a4-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a4%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a4%be/): अब्दाली भाऊ सदाशिव राव इतिहास ने हमें बहुत कुछ दिया है… कुछ बहुत अच्छा, तो कुछ बहुत बुरा! जहां अपने किस्सों से इतिहास ने हमें गौरवान्वित किया है, तो वहीं कुछ किस्से हमारे दिल में नासूर बन कर रह गए हैं. इतिहास ने अपने आंचल में इसी तरह के एक किस्से को सहेज रखा है, जिसे सुनते ही धमनियों में बहते रक्त की गति सामान्य से कहीं अधिक हो जाती है. यह घटना थी 18वीं सदी में लड़े गए सबसे विनाशकारी युद्धों में से एक पानीपत का तीसरा युद्ध, जिसने एक दिन में हज़ारों योद्धाओं को काल का ग्रास बना […] - [Third Battle of Panipat – Maratha v/s Abdali](https://sushilrawal.com/third-battle-of-panipat-maratha-v-s-abdali/): The third battle of Panipat, which was fought between the Afghans and the Marathas in 1761. There is a plethora of information available on the third battle of Panipat, down to the exact dispositions of the men and officers. This has been the most analyzed battle in the ancient to medieval era in India. Thus this story can be recounted in exact detail. The roots of the expedition lay in Afghan king Ahmad Shah Abdali’s repeated invasions of India. In 1757, he invaded again at the invitation of Najib Khan Rohilla, the leader of the Afghans who had settled in […] - [चंगेज़ खान – पहला मंगोल शासक](https://sushilrawal.com/%e0%a4%9a%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%87%e0%a4%9c-%e0%a4%96%e0%a4%be%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8b%e0%a4%b2-%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%95/): प्रारंभिक जीवन :चंगेज़ खान का जन्म ११६२ के आसपास आधुनिक मंगोलिया के उत्तरी भाग में ओनोन नदी के निकट हुआ था। चंगेज़ खान की दांयी हथेली पर पैदाइशी खूनी धब्बा था।उसके तीन सगे भाई व एक सगी बहन थी और दो सौतेले भाई भी थे।उसका वास्तविक या प्रारंभिक नाम तेमुजिन (या तेमूचिन) था। मंगोल भाषा में तिमुजिन का मतलब लौहकर्मी होता है।उसकी माता का नाम होयलन और पिता का नाम येसूजेई था जो कियात कबीले का मुखिया था। येसूजेई ने विरोधी कबीले की होयलन का अपहरण कर विवाह किया था।लेकिन कुछ दिनों के बाद ही येसूजेई की हत्या कर दी […] - [मेवाड़ के संस्थापक - बप्पा रावल](https://sushilrawal.com/%e0%a4%ac%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2/): बप्पा रावल को “कालभोज” के नाम से भी जाना जाता है जन्म – 713-14 ई. इनके समय चित्तौड़ पर मौर्य शासक मान मोरी का राज था 734 ई. में बप्पा रावल ने 20 वर्ष की आयु में मान मोरी को पराजित कर चित्तौड़ दुर्ग पर अधिकार किया वैसे तो गुहिलादित्य/गुहिल को गुहिल वंश का संस्थापक कहते हैं, पर गुहिल वंश का वास्तविक संस्थापक बप्पा रावल को माना जाता है बप्पा रावल को हारीत ऋषि के द्वारा महादेव जी के दर्शन होने की बात मशहूर है एकलिंग जी का मन्दिर – उदयपुर के उत्तर में कैलाशपुरी में स्थित इस मन्दिर का […] - [पुष्यमित्र शुंग – शुंग साम्राज्य के संस्थापक](https://sushilrawal.com/%e0%a4%aa%e0%a5%81%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b6%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%97-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%ae/): पुष्यमित्र शुंग उत्तर भारत के शुंग साम्राज्य के संस्थापक और प्रथम राजा थे। इससे पहले वो मौर्य साम्राज्य में सेनापति थे। १८५ ई॰पूर्व में उन्होंने अन्तिम मौर्य सम्राट (बृहद्रथ) की सैन्य समीक्षा के दौरान हत्या कर दी और अपने आपको राजा उद्घोषित किया। उसके बाद उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया और उत्तर भारत का अधिकतर हिस्सा अपने अधिकार क्षेत्र में ले लिया। शुंग राज्य के शिलालेख पंजाब के जालन्धर में पुष्यमित्र का एक शिलालेख मिले हैं और दिव्यावदान के अनुसार यह राज्य सांग्ला (वर्तमान सियालकोट) तक विस्तृत था। पुष्यमित्र शुंग अंतिम मौर्य शासक वृहद्रथ के प्रधान सेनापति थे | मगध सम्राट […] - [अजेय योद्धा – पेशवा बाजीराव](https://sushilrawal.com/%e0%a4%85%e0%a4%9c%e0%a5%87%e0%a4%af-%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a5%87%e0%a4%b6%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%b0%e0%a4%be/): पेशवा बाजीराव प्रथम (श्रीमंत पेशवा बाजीराव बल्लाळ भट्ट) (१७०० – १७४०) महान सेनानायक थे। वे १७२० से १७४० तक मराठा साम्राज्य के चौथे छत्रपति शाहूजी महाराज के पेशवा (प्रधानमन्त्री) रहे। इनका जन्म चित्ताबन कुल के ब्राह्मणों में हुआ। इनको ‘बाजीराव बल्लाळ’ तथा ‘थोरले बाजीराव’ के नाम से भी जाना जाता है। इन्हें प्रेम से लोग अपराजित हिन्दू सेनानी सम्राट भी कहते थे। इन्होंने अपने कुशल नेतृत्व एवं रणकौशल के बल पर मराठा साम्राज्य का विस्तार (विशेषतः उत्तर भारत में) किया। इसके कारण ही उनकी मृत्यु के २० वर्ष बाद उनके पुत्र के शासनकाल में मराठा साम्राज्य अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच […] - [महाराजा रणजीत सिंह](https://sushilrawal.com/%e0%a4%ae%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%a3%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%82%e0%a4%b9/): सिख शासन की शुरुवात करने वाले महाराजा रणजीत सिंह ने उन्नीसवी सदी में अपना शासन शुरू किया, उनका शासन पंजाब प्रान्त में फैला हुआ था और उन्होने दल खालसा नामक एक संगठन का नेतृत्व किया था. उन्होने छोटे गुटों में बंटे हुए सिखों को एकत्रित किया. उनके बाद उनके पुत्र खड़ग सिंह ने सिख शासन की कमान संभाली. महाराजा रणजीत सिंह ने मिसलदार के रूप में अपना लोहा मनवा लिया था और अन्य मिसलदारों को हरा कर अपना राज्य बढ़ाना शुरू कर दिया था. पजाब क्षेत्र के सभी इलाकों में उनका कब्ज़ा था पूर्व में अंग्रजों के और पश्चिम में […] - [जाट राजा सूरजमल](https://sushilrawal.com/%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%9f-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%82%e0%a4%b0%e0%a4%9c%e0%a4%ae%e0%a4%b2/): महाराजा बदनसिंह की मृत्यु के बाद उसके पुत्र महाराजा सूरजमल जाट 1756 ई. में भरतपुर राज्य का शासक बना. राजनैतिक कुशलता और कुशाग्र बुद्धि के कारण उसे जाट जाति का प्लेटों भी कहा जाता है. आगरा, मेरठ, मथुरा, अलीगढ़ आदि उसके राज्य में सम्मिलित थे. महाराजा सूरजमल अन्य राज्यों की तुलना में हिन्दुस्तान का सबसे शक्तिशाली शासक था. इनकी सेना में 1500 घुड़सवार व 25 हजार पैदल सैनिक थे. उन्होंने अपने पीछे 10 करोड़ का सैनिक खजाना छोड़ा. मराठा नेता होलकर ने 1754 में कुम्हेर पर आक्रमण कर दिया. महाराजा सूरजमल ने नजीबुद्दोला द्वारा अहमद शाह अब्दाली के सहयोग से […] - [योगी आदित्यनाथ](https://sushilrawal.com/%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a5/): इनका जन्म 5 जून 1972 को पिचूर गाँव, यमकेश्वर तहसील पौढी गडवाल उत्तराखंड में एक राजपूत परिवार में हुवा था। इनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट और माता का नाम सावित्री देवी है। योगी जी ने सन 1977 में टिहरी गडवाल के गजा के स्कूल से अपनी शिक्षा की सुरुआत की। सन 1989 को इन्होने ऋषिकेश के भरत मन्दिर इन्टर कॉलेज से 12th पास करी और सन 1992 में हेमवती नन्दन बहुगुणा गडवाल विश्वविद्यालय से इन्होने गणित में B.Sc की और इसी कॉलेज से M.Sc भी की। सन 1993 में योगी जी गोरखपुर आए और यहाँ उनकी मुलाक़ात गोरखनाथ […] - [Yogi Adityanath – Monk Who Became Chief Minister](https://sushilrawal.com/yogi-adityanath-monk-who-became-chief-minister/): Yogi Adityanath is the twenty-first chief minister of Uttar Pradesh who was born on 5th June 1972 in an ordinary family of Garhwali Rajput in a village named Panchur, in the district of Pauri Garhwal in Uttarakhand. He was named Ajay Singh Bisht by his father who was a forest ranger named Anand Singh. Ajay Singh Bisht completed his graduation in mathematics from the Hemwati Nandan Bahuguna Garhwal University of Uttarakhand. Unlike his predecessors, he is well known for his selfless service and clean politics who is beyond caste-based games and intern consolidating various Hindu castes. Full Name – Shri […] - [Narendra Damodardas MODI](https://sushilrawal.com/narendra-damodardas-modi/): Narendra Modi is our current Prime Minister of India. On 30 May 2019, for the second term, he was sworn-in as India’s Prime Minister. His full name is Narendra Damodardas Modi. He is a personality of motivation who rose from a poverty-stricken tea-selling boy to a development-oriented leader. Let us read about the biography of Narendra Modi which depicts his early life, family, education, political career, awards and recognition, books written by him, etc. Narendra Modi was born on 17 September 1950 in Vadnagar, Gujarat to a lower-middle-class family of grocers. He has proved that success has nothing to do […] - [Bhagwan Shree Osho Rajneesh](https://sushilrawal.com/bhagwan-shree-osho-rajneesh/): Osho Rajneesh was an Indian mystic, guru and spiritual teacher who created the spiritual practice of dynamic meditation. A controversial leader, he had millions of followers worldwide, and also thousands of detractors. Confident and outspoken, he was a gifted speaker who never shied away from expressing his views on a variety of topics, even those considered to be taboo by the conservative society. Born in India into a large family, he was sent to live with his grandparents who played a major role in making him the person he eventually became. He grew up to be a rebellious teenager and […] - [Complete Guide To Udaipur Travel](https://sushilrawal.com/complete-guide-to-udaipur-travel/): Rajasthan is one state of India that gives many images at once when one thinks about it. The vast desert, the Rajputana Heritage, India’s largest state and many more. Udaipur, probably the most famous leisure destination in Rajasthan has all of these images…and that too in a good measure! In this article, let me take you through Udaipur, which is known for its Cultural Heritage, Beautiful Lakes, Spicy Food, Royal Palaces and much much more. Udaipur city is situated 598 metre above sea level in the southern part of the Indian state, Rajasthan. It has an area of 37 square […] - [Rishikesh – Yoga Capital Of Word](https://sushilrawal.com/rishikesh-yoga-capital-of-word/): ‘I’m in North India to find myself’. It’s such a traveller cliché that I physically recoiled every time someone told me this was the motivation behind their trip. So nobody is more surprised than me that I wrote this month’s column from a picturesque Ashram in Rishikesh, where tourists flock to for retreats, yoga teacher training and holistic therapies. When I told my friends I had gone a bit ‘Eat, Pray, Love’, they questioned how long I’d last in this car-free, alcohol-free and meat-free hippy hub. They worried I’d been smoking too many chillums or that all that Himalayan fresh […] - [सिक्किम भारत का हिस्सा कैसे बना – Sushil Rawal](https://sushilrawal.com/sikkim-merge-india/): जून १९७५ की बात है। पान सुपारी एक्सपोर्ट करने वाला एक व्यपारी ढाका बांग्लादेश पहुंचा यह उसकी मुलाकात बांग्लादेश के राष्ट्रपति शेख मुजीबुर रेहमान से हुयी। मुजीब को लगा की बात व्यापर पर होगी लेकिन बिच मीटिंग में उस व्यपारी ने मुजीब की ऐसी बात बताई जो मुजीब के पेरो से जमीं खिचका सकती थी। इस आदमी ने मुजीब हो बताया की बोहत जल्द उनका तक्था पलट होने वाला है और इतना ही नहीं तख्ता पलट कोण करने वाला है ये भी उस शक्श को पहले से पता था। एक घंटे चली मीटिंग में राष्ट्रपति को समझने की खूब कोशिश […] - [चीन को चकमा दे के भारत कैसे आये दलाई लामा](https://sushilrawal.com/dalai-lama/): तुम्हारा चेहरा देख के मुझे एहसास हुआ है की में भी बूढ़ा हो चूका हु।  दलाई लामा के मुँह से ये शब्द निकले जब २०१७ में वो उत्तर पूर्व भारत के दौरे पर थे और यहाँ उनकी मुलाकात हुयी नरेंद्र च्नद्र से। और ७९ साल के नरेंद्र को देखते ही दलाई लामा को मार्च १९५९ याद आ गया जब वो चीन के सेनिको से बचते बचाते भारत आये थे। और तवान्ग में उनकी अगवानी की थी भारतीय सेनिको ने नरेंद्र उन्ही सेनिको में से एक थे। १९५९ का बसंत और शनिवार की आधी रात ज्होन गरिनि के घर एक घंटी […] - [भारत में राज्यों का विभाजन भाषा के आधार पर क्यों हुआ ?](https://sushilrawal.com/indian-state/): इतना तो हम सब जानते ही है की भारत में राज्यों का पुनर्गठन भाषा के आधार पर हुआ। पर लोगो के इस पर अलग अलग तर्क है और धर्म की तरह भाषा भी एक तरह का सब्जेक्ट है जो लोगो की भावना के साथ जुड़ा हुआ है इसलिए इस विषय पे ज्यादा बोलना या लिखना किसी की भावना आहत कर सकता है। मेरी कोशिश यही है की इसको गहराई से समझा जाये। मूल भाषा के महत्व को अगर हम समझ जाये तो भाषा की आधार पर राज्यों के गठन का कारन थोड़ा थोड़ा समझ आ जायेगा। भाषा के आधार पर […] - [अडोल्फ हिटलर भारतीयों के बारे में क्या सोचता था ?](https://sushilrawal.com/adolf-hitler/): 1928 में हिटलर की आत्माकथा mein kampf भारत में पब्लिश हुयी और अगले 90 सालो तक बेस्ट सेलर का हिस्सा बनती रही। दुनियाभर में हिटलर के प्रशंषको की कमी नहीं है लेकिन विशेषरूप से भारत में एक मिथक आम है की हिटलर भारत और भारतीयों का समर्थक था। इस मिथक को बढ़ावा मिलता है तीन कारणों से. 1 हिटलर की नेताजी सुभाषचंद्र बोस से मुलाकात। 2 स्वस्तिक चिन्ह का प्रयोग 3 हिटलर आर्यो यानि भारतीयों को सबसे श्रेष्ठ नस्ल मानता था। 20 अप्रेल 1889 को हिटलर का जन्म हुआ था। पहले विश्वयुद्ध के बाद जनवरी 1920 को उसे जर्मन वर्कर […] - [1977 में IBM और कोका कोला भारत से क्यों भागी](https://sushilrawal.com/ibm-coca-cola-1977/): IBM की स्थापना 1911 में हुयी थी और आने वाले सालो में कंपनी इतनी बड़ी बन गयी की इसे बिग ब्लू कहा जाने लगा। दरसल नई यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज के चुनिंदा ब्लू स्टॉक थे और उनमे से एक IBM भी थी। दुनिया में सबसे बड़ी कम्पनीस में इसका नंबर आठवा होता था। भारत में IBM की एंट्री हुयी साल 1952 में। प्रधानम्नत्री जवाहरलाल नेहरू भारत में उन्नत तकनीक को लाना चाहते थे इसलिए उन्होंने IBM को भारत आने का न्योता दिया। शरुआत में कंप्यूटर का काम गिना चुना होता था इसलिए इनका काम IIT या IIM में रिसर्च के कामो […] - [1971 युद्ध की वो कहानी जिसने युद्ध का खेल पलट दिया](https://sushilrawal.com/1971-war/): 1969 की बात है ब्लिक्स नाम के एक अख़बार में एडमिरल नंदा का इंटरव्यू छपा जिसमे नंदा कहते है की कराची को में अपनी हथेली तरह जनता हूँ और अगर मौका मिले तो हम कराची बंदरगाह को आग लगा सकते है। एडमिरल नंदा नेवी चीफ बनने की लाइन में थे और उनका अख़बार में ऐसे इंटरव्यू देना बड़े रिस्क की बात थी। सम्भव था उनका प्रमोशन रुक जाता लेकिन नंदा किसी भी कीमत पर नेवी की छवि को बदलना चाहते थे। इसका कारण ये था की नेवी को 1965 के युद्ध ने सिर्फ २०० नॉटिकल मिल जाने की इजाजत मिली […] - [हरी सिंह नलवा – सिक्खो का पराक्रमी यौद्धा](https://sushilrawal.com/hari-singh-nalwa/): हरी सिंह नलवा का जन्म 1791 में गुजरावाला में हुआ था। 1967 में आयी फिल्म उपकार का नाम अपने सुना होगा। उस फिल्म के गाने मेरे देश ही धरती सोना उगले गाने के दूसरे अन्तरे के बोल है रंग हरा हरी सिंह नलवे से रंग लाल है लाल बहादुर से रंग बना बसंती भगत सिंह। इस गाने में जो हरी सिंह नलवा है उसके बारे में बताता हूँ। साल 2014 में ऑस्ट्रेलिया की एक पत्रिका ने इतिहास के दस बड़े विजेताओं को सूचि निकाली और इस सूचि में हरी सिंह नलवा का नाम सबसे ऊपर था। काबुल और पाकिस्तान में […] - [एक तांत्रिक जिसका नाम ब्रिटैन की प्रधानमंत्री तक से जुड़ा – चंद्रा स्वामी ](https://sushilrawal.com/chandra-swami/): तांत्रिक नाम सुनते ही दिमाग में छवि बनती है भूत प्रेत जादू टोना ऐसी सभी चीजों की। लेकिन जिस तांत्रिक के बारे में बताने जा रहा हूँ उसका लेना देना था राजनेताओ से। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश अपनी किताब ब्रिंग एंड बैक में जिक्र करते है 1991 का साल था देश में आर्थिक संकट के बादल थे और नरशिमा राव ने आर्थिक सुधारो की घोषणा की लेकिन फॉरेन रिसर्व खाली होने के कगार पे था। ऐसे में एक दिन राव अपने गुरु चंद्रा स्वामी से मिलने गए और चंद्रा स्वामी ने राव की हाथ की लकीरो को देखते हुए […] - [वास्को डी गामा ने कैसे ढूंढा भारत को](https://sushilrawal.com/vasco-de-gama/): छ टोपिया मूंगे की चार माला चीनी का एक बक्शा दो तेल के पीपे दो पीपे शहद के और एक थान कपडे का। ये उन चीजों की लिस्ट जो वास्को डी गामा ने कालीकट के उतार कर वहा की राजा झामोरिन को पेश की। जैसे ही इन चीजों की दरबारियों की देखा सब की हसी छूट गयी क्युकी ये दोनों की बिच पहली मुलाकात नहीं थी उससे दो दिन पहले जान झामोरिन की मुलाकात वास्को डी गामा से हुयी थी जब उससे पूछा गया की किस लिए आये हो तो उसने जवाब दिया था की में पुर्तगाल की राजा का […] - [कहानी असली मोगली की](https://sushilrawal.com/mogli/): बात तब की है जब दूरदर्शन पे पहली बात जंगल बुक आया और लोगो ने मोगली को देखा। मोगली तो हिट हुआ ही लेकिन उससे भी ज्यादा हिट हुआ गाना जंगल जंगल बात चली है पता चला है चड्डी पहन के फूल खिला है। इस गीत को लिखा था गुलजार ने तो किस्सा यू है की जब गुलजार ने ये गीत लिखा तो डायरेक्टर ने कहा की बस चड्डी शब्द हटा दीजिये। क्युकी बच्चो का गाना है तो ये शब्द अच्छा नहीं लगता लेकिन गुलजार अड़ गए की ये शब्द तो नहीं हटेगा। अंत में डायरेक्टर को गुलजार की बात […] - [महान हिन्दू राजा – हरीहर राय और बुक्का राय](https://sushilrawal.com/harihar-rai-bukka-rai/): हरिहर राय और बुक्का राय प्रसिद्ध राजा थे जिन्होंने मुगल हमलावरों को पूरी तरह से पराजित करने के बाद शंकराचार्य विद्यारण्यस्वामी के मार्गदर्शन में विजयनगर के स्वतंत्र साम्राज्य की स्थापना की थी। उन्होंने 1336 ई. से 1376 ई. तक अर्थात 40 वर्षों तक विजयनगर पर शासन किया और एक समृद्ध हिन्दू राज्य की स्थापना की। यह विजयनगर साम्राज्य, जो दक्षिण भारत के इतिहास में शाश्वत है, तुंगभद्रा नदी के तट पर स्थित है। संगमा, एक यादव परिवार का जमींदार, ‘होसला’ वंश के दरबार में था। उनके 5 पुत्र थे, जिनके नाम हरिहर, बुक्का, कम्पन्ना, मरप्पा और मुदप्पा थे। विजयनगर राज्य […] - [बप्पा रावल: मेवाड़ के महान योद्धा राजा](https://sushilrawal.com/bappa-rawal/): भारतीय इतिहास के इतिहास में वीरता और पराक्रम की अनगिनत गाथाएं हैं जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती हैं। ऐसी ही एक उल्लेखनीय शख्सियत हैं मेवाड़ के महान योद्धा राजा बप्पा रावल। बप्पा रावल की बहादुरी, नेतृत्व और अटूट दृढ़ संकल्प ने उन्हें साहस और लचीलेपन का प्रतीक बना दिया है। यह ब्लॉग बप्पा रावल के जीवन और उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है, भारत के इतिहास पर उनकी अमिट छाप पर प्रकाश डालता है। बप्पा रावल, जिन्हें कालभोज या कालभोज के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 8वीं शताब्दी ईस्वी में हुआ था। वह राजपूतों के गुहिलोत वंश […] - [चोल साम्राज्य: दक्षिण भारत के गौरव की गाथा](https://sushilrawal.com/post-number-three-lorem-ipsum-dolor-sit-amet/): चोल साम्राज्य, एक उल्लेखनीय और प्रभावशाली राजवंश जो भारत के दक्षिणी भाग में पनपा, ने इतिहास पर एक अमिट छाप छोड़ी है। 9वीं से 13वीं शताब्दी तक फलते-फूलते चोल अपने चतुर प्रशासन, जीवंत संस्कृति, समुद्री कौशल और कला, साहित्य और वास्तुकला में महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाने जाते थे। यह ब्लॉग चोल साम्राज्य के दिलचस्प इतिहास पर प्रकाश डालता है, इसके उत्थान, उपलब्धियों और स्थायी विरासत की खोज करता है जो पीढ़ियों को प्रेरित करती रहती है। चोल राजवंश का उदय चोल राजवंश की उत्पत्ति का पता वर्तमान तमिलनाडु में कावेरी नदी डेल्टा की उपजाऊ भूमि से लगाया जा सकता […] - [कुबलई खान की विरासत: महान खान का शासनकाल](https://sushilrawal.com/kublai-khan/): इतिहास के इतिहास में, कुछ नाम कुबलई खान के समान भव्यता और शक्ति के साथ गूंजते हैं। दुर्जेय चंगेज खान के पोते के रूप में, कुबलई खान प्रमुखता से उभरे और इतिहास के पाठ्यक्रम पर एक अमिट छाप छोड़ते हुए युआन राजवंश की स्थापना की। आइए कुबलई खान के जीवन, विजय और स्थायी विरासत का पता लगाने के लिए समय की यात्रा पर निकलें। प्रारंभिक जीवन: 1215 में जन्मे कुबलाई खान चंगेज खान के बेटों में से एक टोलुई के चौथे बेटे थे। उनके जन्मसिद्ध अधिकार ने उन्हें मंगोल साम्राज्य के भीतर नेतृत्व का जीवन दिया। खानाबदोश जीवनशैली के बीच […] - [कामाख्या मंदिर: शक्ति और रहस्य का प्रतीक](https://sushilrawal.com/kamakhya-temple/): असम की राजधानी दिसपुर के पास स्थित कामाख्या मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध और पवित्र शक्तिपीठों में से एक है। यह मंदिर नीलाचल पहाड़ी पर स्थित है और यहां देवी सती के योनि भाग (महामुद्रा) की पूजा की जाती है। कामाख्या मंदिर हिंदू धर्म में विशेष रूप से तांत्रिक परंपरा के लिए महत्वपूर्ण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कामाख्या मंदिर का इतिहास कामाख्या मंदिर का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव अपनी पत्नी सती के मृत शरीर को लेकर […] ## Pages - [My account](https://sushilrawal.com/my-account/) - [About](https://sushilrawal.com/about-2/): [vc_row][vc_column][/vc_column][/vc_row][vc_row full_width=”stretch_row_content” equal_height=”yes” content_placement=”middle” woodmart_parallax=”0″ woodmart_gradient_switch=”no” row_reverse_mobile=”0″ row_reverse_tablet=”0″ woodmart_disable_overflow=”0″ css=”.vc_custom_1538148107959{margin-bottom: 80px !important;}”][vc_column width=”1/2″ css=”.vc_custom_1538148071258{margin-bottom: 40px !important;}” woodmart_parallax=”0″ parallax_scroll=”no” woodmart_sticky_column=”false”][vc_single_image image=”2615″ img_size=”full” alignment=”center” css=”” parallax_scroll=”no” woodmart_inline=”no”][/vc_column][vc_column width=”1/2″ woodmart_parallax=”0″ parallax_scroll=”no” woodmart_sticky_column=”false” css=”.vc_custom_1538148062336{margin-bottom: 40px !important;}”][woodmart_responsive_text_block size=”custom” color_scheme=”dark” woodmart_css_id=”68b775125f7c2″ content_width=”80″ text_font_size=”eyJwYXJhbV90eXBlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV9zaXplIiwiY3NzX2FyZ3MiOnsiZm9udC1zaXplIjpbIiAud29vZG1hcnQtdGV4dC1ibG9jayJdfSwic2VsZWN0b3JfaWQiOiI2OGI3NzUxMjVmN2MyIiwiZGF0YSI6eyJkZXNrdG9wIjoiMzhweCIsInRhYmxldCI6IjMycHgiLCJtb2JpbGUiOiIyOHB4In19″ inline=”no” responsive_spacing=”eyJwYXJhbV90eXBlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV9zcGFjaW5nIiwic2VsZWN0b3JfaWQiOiI2OGI3NzUxMjVmN2MyIiwic2hvcnRjb2RlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV90ZXh0X2Jsb2NrIiwiZGF0YSI6eyJ0YWJsZXQiOnt9LCJtb2JpbGUiOnt9fX0=”]My name is Sushil Rawal[/woodmart_responsive_text_block][woodmart_responsive_text_block size=”custom” woodmart_css_id=”68b7751c391ad” content_width=”80″ text_font_size=”eyJwYXJhbV90eXBlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV9zaXplIiwiY3NzX2FyZ3MiOnsiZm9udC1zaXplIjpbIiAud29vZG1hcnQtdGV4dC1ibG9jayJdfSwic2VsZWN0b3JfaWQiOiI2OGI3NzUxYzM5MWFkIiwiZGF0YSI6eyJkZXNrdG9wIjoiMTRweCIsIm1vYmlsZSI6IjEycHgifX0=” inline=”no” responsive_spacing=”eyJwYXJhbV90eXBlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV9zcGFjaW5nIiwic2VsZWN0b3JfaWQiOiI2OGI3NzUxYzM5MWFkIiwic2hvcnRjb2RlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV90ZXh0X2Jsb2NrIiwiZGF0YSI6eyJ0YWJsZXQiOnt9LCJtb2JpbGUiOnt9fX0=”] I’m Sushil Rawal, a passionate traveler, avid reader, and writer. I want to take risks, meet interesting people, go hard, challenge myself, and explore the world. People without knowledge of their history, origin, and culture is like a tree without roots. [/woodmart_responsive_text_block][social_buttons type=”follow” style=”bordered” color=”dark” woodmart_css_id=”68b7752be68db” show_label=”no” responsive_spacing=”eyJwYXJhbV90eXBlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV9zcGFjaW5nIiwic2VsZWN0b3JfaWQiOiI2OGI3NzUyYmU2OGRiIiwic2hvcnRjb2RlIjoic29jaWFsX2J1dHRvbnMiLCJkYXRhIjp7InRhYmxldCI6e30sIm1vYmlsZSI6e319fQ==”][/vc_column][/vc_row] - [Privacy Policy](https://sushilrawal.com/privacy-policy/): Who we are Suggested text: Our website address is: https://sushilrawal.com. Comments When visitors leave comments on the site, we collect the data shown in the comments form, as well as the visitor’s IP address and browser user agent string, to help with spam detection. 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Media If you […] - [Sushil Rawal](https://sushilrawal.com/): edit HindiHistory पुष्यमित्र शुंग – शुंग साम्राज्य के संस्थापक पुष्यमित्र शुंग उत्तर भारत के शुंग साम्राज्य के संस्थापक और प्रथम राजा थे। इससे पहले वो मौर्य साम्राज्य में सेनापति थे। १८५ ई॰पूर्व में उन्होंने अन्तिम मौर्य सम्राट (बृहद्रथ) की सैन्य समीक्षा के दौरान हत्या कर दी और अपने आपको राजा उद्घोषित किया। उसके बाद उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया और उत्तर भारत का अधिकतर हिस्सा अपने अधिकार क्षेत्र में ले… Sushil rawal September 3, 2025 edit HindiHistory बाजी प्रभु देशपांडे बाजी प्रभु देशपांडे मराठा इतिहास में बड़ा ही महत्त्वपूर्ण नाम है। वे छत्रपति शिवाजी महाराज के साहसी, निडर और देशभक्ति से […] - [Blog](https://sushilrawal.com/blog-2/) - [Contact us](https://sushilrawal.com/contact-us/): [vc_row equal_height=”yes” css_animation=”none” css=”.vc_custom_1498580074265{margin-right: -40px !important;margin-left: -40px !important;}”][vc_column offset=”vc_col-lg-6 vc_col-md-6″ css=”.vc_custom_1496932335926{border-right-width: 1px !important;padding-top: 20px !important;padding-right: 40px !important;padding-bottom: 10px !important;padding-left: 40px !important;border-right-color: rgba(129,129,129,0.2) !important;border-right-style: solid !important;}”][woodmart_title align=”left” style=”bordered” title=”SEND US AN EMAIL” css=”.vc_custom_1484242758590{margin-bottom: 20px !important;}”][/vc_column][vc_column offset=”vc_col-lg-6 vc_col-md-6″ css=”.vc_custom_1496932331302{padding-top: 20px !important;padding-right: 40px !important;padding-bottom: 10px !important;padding-left: 40px !important;}”][woodmart_title align=”left” style=”bordered” title=”FREQUENTLY ASKED QUESTIONS” css=”.vc_custom_1484251594500{margin-bottom: 20px !important;}”][woodmart_text_block woodmart_css_id=”68b775bfd5f6e” parallax_scroll=”no” woodmart_inline=”no” wd_hide_on_desktop=”no” wd_hide_on_tablet_landscape=”no” wd_hide_on_tablet=”no” wd_hide_on_mobile=”no” responsive_spacing=”eyJwYXJhbV90eXBlIjoid29vZG1hcnRfcmVzcG9uc2l2ZV9zcGFjaW5nIiwic2VsZWN0b3JfaWQiOiI2OGI3NzViZmQ1ZjZlIiwic2hvcnRjb2RlIjoid29vZG1hcnRfdGV4dF9ibG9jayIsImRhdGEiOnsidGFibGV0Ijp7fSwibW9iaWxlIjp7fX19″] I’m Sushil Rawal, a passionate traveler, avid reader, and writer. I want to take risks, meet interesting people, go hard, challenge myself, and explore the world. People without knowledge of their history, origin, and culture is like a tree […] ## Optional - [Agent (MCP protocol)](websites-agents.hostinger.com/sushilrawal.com/mcp) [comment]: # (Generated by Hostinger Tools Plugin)